Wednesday, 27 October 2010

अव्यक्त

उठती हैं तरंगे-
कुछ हलचल है,
बहते जल में भी कल कल है,
कोई खींचे अपनी और मुझे,
कोई बहुत करीब मेरे-
जो संग मे रहता हर पल है १
कोई प्रेरित करता भावों को,
मूक है किन्तु बोले भी,
बिन वाणी ही  मुझसे बात करे,
दृष्टि से ओझल वो कोन भला ?
जो प्रश्न हुआ है मेरे लिए १
बिन देखे जिसे महसूस करूँ,
आभास ह्रदय में होता है,
कोई है,कोई है मेरा अपना-
जिस से स्फुरित मन होता है १
मन क्या है ?
केवल भाव ही तो,
ये भाव कहाँ से उठते हैं ?
जो देते मेरा अस्तित्व  मुझे,
कौन  है इनका रचनाकार ?
कुछ है, कोई है, कोई तो है ११
मैं कैसे उपमा उसकी करूँ?
वो कौन है, क्या है कैसे कहूं ?
मूक है वो-
मैं भी चुप हूँ....
फिर भी मन को कुछ खींच रहा,
''अव्यक्त'' कहीं, कोई कुछ है,
उठती हैं तरंगे-
कुछ हलचल है....११

2 comments:

  1. मन क्या है ?
    केवल भाव ही तो,
    ये भाव कहाँ से उठते हैं ?
    जो देते मेरा अस्तित्व मुझे,
    कौन है इनका रचनाकार ?
    कुछ है, कोई है, कोई तो है ११
    मैं कैसे उपमा उसकी करूँ?
    वो कौन है, क्या है कैसे कहूं ?
    मूक है वो-
    मैं भी चुप हूँ....
    फिर भी मन को कुछ खींच रहा,
    ''अव्यक्त'' कहीं, कोई कुछ है,
    उठती हैं तरंगे-
    कुछ हलचल है
    very nice...........poem.....thanks

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