Tuesday, 2 November 2010

स्पंदन

जब बात कोई मन को छू जाए
चित में बहुत रुदन होता है
पाषाण ह्रदय में-
 कैसे स्पंदन हो ??
निर्मल चित ही स्पंदित होता है १
मेघ बरसते हैं नभ में क्यूँ ?
क्यूंकि नभ में ऊंचाई है
सागर में तूफ़ान उठे क्यूँ ?
क्यूंकि उसमें गहराई है १
मूरत लेते हुए सपने जब
क्षणभर में बिखर जाते हैं
भाव लेते हैं अश्रुरूप -
अश्रुओं से चित खुद को धोता है १
दुर्बलता बने हास्य का कारण
चित में अस्थिरता बढ़ जाती है
लज्जाहीन को पीड़ा कैसी ?
स्वाभिमानी को लाज बहुत आती है १
जब कहनी हो बहुत सी बातें
नहीं सुनने वाला कोई होता है
यह पीड़ा केवल वे जन ही जानें -
जिनसे दूर कोई उनका होता है १
अनुभव ही तो सिखलाते  हैं
सम्पूर्ण कहाँ कोई होता है
निर्मलता  रहती है अंत:करण में जिनके
उनका ह्रदय स्पंदित होता है १

1 comment:

  1. bhut achhe sir g, lge rho..khan se late ho aisi soch..

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