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Thursday, 28 October 2010

तुम बिन ...

तुम बिन दिवाली सूनी है,
तुम बिन होली में रंग नहीं,
दीपक तो जलाएँ हैं लेकिन
अफ़सोस है तुम मेरे संग नहीं ११


मैं जानता हूँ तुम नहीं आओगे,
मै भी तो नहीं आ सकता हूँ,
तन से हम चाहे दूर रहें ,
मिलने की दुआएँ करता हूँ ११

कहता था तुम्हें नहीं याद करूंगा,
याद बहुत पर आती है,
जो चाह था वो पाया मगर,
तेरी ममता कहाँ मिल पाती है ११

मैने अपने हरि को देखा नहीं,
पर  तुम में उसको खोजा है,
जब तुम ही मेरे संग में नहीं,
मेरा हर दिन अब इक रोज़ा है ११

तुम भी तो दीप जगा  लेना,
अंधियारा कहीं ना रह जाएँ,
दीपों को जगाते हुए शायद,
तुम को भी मेरी याद आएं ११

तुम याद भले ही कर लेना,
पर आँख में पानी मत आएं,
खुशियों से भरा ये उत्सव है,
चेहरों पर ख़ुशी बस लहराएँ ११

Wednesday, 27 October 2010

अनंत सागर

हे अनंत सागर
तुम और मैं कितने एक सामान,
तुम भी निरंतर बह रहे,
मेरे भी आंसूं नहीं ले रहे थमने का नाम
जैसे आता है उफान तुझमें,
हर पूर्णिमा की रात को
मन मेरा भी व्यथित हो उठता है,
लेकर छोटी -छोटी बात को १
कमजोर हूँ ऐसा नहीं
मुझमें  भी तुझसा बल है,
अभिलाषाएँ मुझमें भी उतनी
जितना तुझ मे जल है १
भींगी हैं पलकें बस इसलिए
कभी कभी थक मैं जाता हूँ ,
फिर से खड़ा होने के लिए तेरे किनारे आता हूँ १
कहते हैं तेरे गर्भ में श्री हरि का वास है ,
वो ही निर्लेप नारायण हरि मेरे भी ह्रदय के पास है १
तेरे पास आता हूँ तुझमें -
अपनापन पाया है,
मुझमें भी तुझसी गहराई
तुझमें भी मेरा साया है १
शांत तो तू भी नहीं
तेरी लहरों मे भी शोर है,
शांत मेरा चित भी नहीं
हमे बांधती ये ही डोर है १
तू है अनंत,पर क्या -
जानता है अपनी क्षमताओं को ?
मैं भी अनंत,
पर हूँ स्यवं  की खोज में...
कोशिश कर रहा हूँ लांघने की-
जीवन विषमताओं को ११