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Tuesday, 2 November 2010

स्पंदन

जब बात कोई मन को छू जाए
चित में बहुत रुदन होता है
पाषाण ह्रदय में-
 कैसे स्पंदन हो ??
निर्मल चित ही स्पंदित होता है १
मेघ बरसते हैं नभ में क्यूँ ?
क्यूंकि नभ में ऊंचाई है
सागर में तूफ़ान उठे क्यूँ ?
क्यूंकि उसमें गहराई है १
मूरत लेते हुए सपने जब
क्षणभर में बिखर जाते हैं
भाव लेते हैं अश्रुरूप -
अश्रुओं से चित खुद को धोता है १
दुर्बलता बने हास्य का कारण
चित में अस्थिरता बढ़ जाती है
लज्जाहीन को पीड़ा कैसी ?
स्वाभिमानी को लाज बहुत आती है १
जब कहनी हो बहुत सी बातें
नहीं सुनने वाला कोई होता है
यह पीड़ा केवल वे जन ही जानें -
जिनसे दूर कोई उनका होता है १
अनुभव ही तो सिखलाते  हैं
सम्पूर्ण कहाँ कोई होता है
निर्मलता  रहती है अंत:करण में जिनके
उनका ह्रदय स्पंदित होता है ११

Thursday, 28 October 2010

दृष्टिकोण

मिले संस्कार जो बाहर से
कुछ को बुद्धि ने स्वीकार किया
किन्तु अहं भाव होने के कारण
कुछ का प्रतिकार किया
बुद्धि के विश्लेषण के बाद
निज की सोच तैयार हुई
ये ही सोच आगे चलकर
जीवन का आधार हुई
इसी सोच को सही मानकर
सही-गलत का किया चयन
सही लगा जो मेरे मन को
शायद ना भाए किसी और के मन
ये ही ''दृष्टिकोण'' है
या मानो नज़र का फेर
कोई कहता है भोर हुई
कोई कहे सुबह होने में है कुछ देर
यहीं से भेद आता है हममें
यहीं से उठते हैं वाद-विवाद
आधार तो सब  का एक है-
फिर भी,
कोई सजदे में हाथ उठाता है
और कोई करे मंदिर में याद ११